कुछ बिखरे मोती
Monday, 9 March 2020
सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर,
कुछ रातें रखीं हैं,
सर्द, तनहा लमहों के लिए."
1 comment:
Praveen Saxena
30 July 2021 at 00:29
क्या कहने वाह वाह
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