कुछ बिखरे मोती
Wednesday, 4 March 2020
मोहब्बत
"वो जब भी मिलते हैं,
दिल बेक़ाबू हो जाता है,
अब इस कमबख़्त को कौन समझाये,
इश्क़ हमने किया है तुमने नहीं."
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सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर, कुछ रातें रखीं हैं, ...
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दिल की बात (2)
Another version "महफ़िल में तुम को जो गले लगाया, तुम तो इसको मोहब्बत ही समझ बैठे. ...
डर
" तुम्हारे इश्क़ को साँसों में बसा रखा है मौत से भला कौन कमबख़्त डरता है." ...
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