कुछ बिखरे मोती
Tuesday, 3 March 2020
बीड़ी
" बीड़ी जैसे सिलग रही हूँ तेरी यादों में,
काश, तुम्हारे साथ एक कश मिल जाता."
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सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर, कुछ रातें रखीं हैं, ...
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