कुछ बिखरे मोती
Thursday, 5 March 2020
वक़्त
"सुनो, आज वक़्त को जाने दो,
तुम रुक जाओ.
"
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सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर, कुछ रातें रखीं हैं, ...
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