कुछ बिखरे मोती
Saturday, 14 September 2019
नज़्म
"मेरी दीवानगी को लफ़्ज़ों का सहारा मिल गया है
हर बार नज़्म बन कर काग़ज़ पर उतर जाती है."
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सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर, कुछ रातें रखीं हैं, ...
सांसें
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रोज़
" तुम तो आते नहीं, पर तुम्हारी यादें रोज़ आती हैं. "
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