कुछ बिखरे मोती
Thursday, 5 March 2020
रोज़
" तुम तो आते नहीं,
पर तुम्हारी यादें रोज़ आती हैं.
"
1 comment:
Praveen Saxena
30 July 2021 at 00:33
क्या कहने वाह वाह
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