Saturday, 14 September 2019

घर











    "उन मकानों के बीच कभी मेरा घर हुआ करता था, 
          अब सिर्फ़ टूटी दीवारें और यादें रहतीं हैं ."

ठिकाना












                 "उसके दिल के ठिकाने हाजरों थे
               मेरा ठिकाना सिर्फ़ उसका दिल था."

नज़्म























       "मेरी दीवानगी को लफ़्ज़ों का सहारा मिल गया है 
        हर बार नज़्म बन कर काग़ज़ पर उतर जाती है."

आग़ोश












                  "तुमने आग़ोश में क्या भर लिया 
            दुनिया की सारी रंगीनियाँ फीकी पड़ गयीं." 

इश्क़












            "तुमने इश्क़ को बर्बादी का नाम दे दिया 
              हमने बर्बादी को ही इश्क़ समझ लिया."

लफ़्ज़

                     







                 "चलो आज लफ़्ज़ों से नहीं 
                दिल की बात आँखों से करेंगे."
बहुत दिनों से कुछ लिख कर रखा है उन सफ़ेद पन्नों पर जो वक़्त के साथ पुराने हो चले हैं पर उन पर लिखी एक -एक बात आज ही भी वैसी की वैसी है। उन पन्नों पर ज़िंदगी की कुछ स्याह -सफ़ेद बातें, कुछ मुलाक़ातें हैं, हज़ारों यादें, भूली - बिसरी कहानियाँ, कुछ तकरार और मनुहार, बहुत सी शिकायतें, कुछ अनकही और आपकी- हमारी दिल की बातें हैं। 
शायद आपको पसंद आए, यदि पसंद आए तो अपने कामेंट्स ज़रूर लिखाएगा, पढ़ कर अच्छा लगेगा।
धन्यवाद

सांसें

                     "गरम साँसों में लपेट कर,                            कुछ रातें रखीं हैं,                 ...