कुछ बिखरे मोती
Monday, 9 March 2020
सांसें
"गरम साँसों में लपेट कर,
कुछ रातें रखीं हैं,
सर्द, तनहा लमहों के लिए."
Thursday, 5 March 2020
दिल की बात (2)
Another version
"महफ़िल में तुम को जो गले लगाया,
तुम तो इसको मोहब्बत ही समझ बैठे.
"
दिल की बात
"महफ़िल में जब उन्होंने,
हमको गले से लगाया,
धीरे से बोले,
जानती हो आज भी,
हम तुमसे बेपनाह मोहब्बत करते हैं.
"
चाँद
"तुम शुक्ल पक्ष का चाँद बन
मेरी अमावस वाली रातों में रोशनी भर दो.
"
जादूगरी
"लफ़्ज़ों की जादूगरी तो देखिए जनाब
कभी दर्द बन जाते हैं, तो कभी दवा.
"
हाल
" दिल का हाल
लफ़्ज़ों में लिख कर,
तुम तक भेजा है,
ज़रा प्यार से पढ़ना.
"
रोज़
" तुम तो आते नहीं,
पर तुम्हारी यादें रोज़ आती हैं.
"
वक़्त
"सुनो, आज वक़्त को जाने दो,
तुम रुक जाओ.
"
सासें
" तुमने
मुड़ कर क्या देखा,
उलझी-उलझी सांसें सुलझ सी गयी.
"
सोलह
"तुमने प्यार से क्या छुआ,
कमबख़्त दिल फिर से सोलह का हो गया.
"
पुरानी
"पुरानी यादों,बातों और किताबों,
पर आज भी तुम्हारा ही नाम लिखा है.
"
ज़िक्र
" तुम्हारा ज़िक्र की काफ़ी है,
मेरी बेरंग रातों को रंगीन बनाने के लिए.
"
Wednesday, 4 March 2020
धूप
"तुम्हारे प्यार की धूप से,
सर्द ज़िंदगी में फिर से गरमाहट आ गयी.
"
इजाज़त
"धड़कनों की इजाज़त हो तो,
आज थोड़ी सी मोहब्बत कर लें.
"
भरोसा
"इन आँखों पर क्या भरोसा करे,
वक़्त-बेवक्त ग़ीली हो जाती हैं.
"
चंद लफ़्ज़
"वो मोहब्बत ही क्या,
जो चंद लफ़्ज़ों में बयान हो जाए.
"
फ़ुर्सत
"अब हम रूठ कर भी क्या करें,
जिन्हें मानना है उन्हें फ़ुर्सत ही नहीं.
"
जिद्द
" बरसों बाद आज जब तुम्हें महफ़िल में देखा,
ये दिल फिर से तुम्हें पाने की जिद्द कर बैठा.
"
यादें
"
तुम्हारी यादें भी बहुत मनमानी करती हैं,
जब भी तनहा होती हूँ,
चुपके से आ कर मुझे घेर लेती हैं."
सेक
" चलो, कोहरे से ढकी सुबह को,
अपनी मोहब्बत का सेक दे दे."
शराब
" पुरानी शराब सी हैं तुम्हारी यादें,
इनका नशा उतरता ही नहीं. "
शिकायत
"तुम से कोई शिकायत नहीं,
बस, बेहिसाब मोहब्बत है."
घर
" मोहल्ले के उस मकान से मुझे बहुत लगाव है,
कभी वो मेरा घर हुआ करता था."
मोहब्बत
"वो जब भी मिलते हैं,
दिल बेक़ाबू हो जाता है,
अब इस कमबख़्त को कौन समझाये,
इश्क़ हमने किया है तुमने नहीं."
यारी
"मोहब्बत करते हैं तुमसे,
इसीलिए, शायद इंतज़ार से यारी कर ली है."
अहसास
" तुम मिलते हो जैसे की सर्दियों की धूप,
ठंडे पड़े अहसासों को भी गरमा जाते हो. "
सुर्ख़ियाँ
" आज चाँद की सुर्खी देख ऐसा लगा,
मानो अपने आशिक़ से मिलकर आया हो."
छूअन
" तुम्हारे छूते ही मानो सब ठहर जाता है,
वक़्त क्या, साँसें ही थम सी जाती हैं. "
उम्मीद
" इंतज़ार का कुछ अलग ही मज़ा है,
कम से कम उम्मीद तो बनी रहती है. "
Tuesday, 3 March 2020
सहारा
" अब तो सहारा लेना छोड़ दो,
यह बहाने भी थक गए हैं,
तुम्हारे झूठ को कंधा देते-देते. "
नमक
" नमक सी वो,
मेरी बेस्वाद ज़िंदगी को,
कितना नमकीन बना देती है."
रुख्सत
" रुख्सत करते हैं अब तेरी यादों को,
शायद, हमारे दिल में उनका दम घुटता है."
धुआँ
" धुआँ होती रही यादें तुम्हारी,
कमबख़्त दिल से एक आह भी ना निकली."
अफ़साने
"अब औरों के क़िस्से क्या सुनाए,
हमारे अपने अफ़साने ही काफ़ी है,
महफ़िल को सुनाने के लिए."
सज़ा
" वो कहते हैं की इंतज़ार का अपना ही मज़ा है,
हम कहते हैं की जो इंतज़ार उन्हें ना लाए वो एक सज़ा है."
वक़्त
"कुछ वक़्त भेज रही हूँ तुम्हारे लिए,
जब वक़्त मिले तो मुझे याद कर लेना."
बेसब्री
"हमारी बेसब्री का आलम तो देखिए,
फ़ोन की स्याह स्क्रीन को ताकते रहते हैं,
तुम्हारे जवाब के इंतज़ार में."
इंतज़ार
" अब तुम्हें क्या बताए की
इंतज़ार क्या होता है
रात को हवाओं से पूछती हूँ
क्या तुम उनको छू कर आयी हो ?"
इश्क़
"वो इश्क़ ही क्या
जो बर्बाद ना कर दे. "
डर
" तुम्हारे इश्क़ को साँसों में बसा रखा है
मौत से भला कौन कमबख़्त डरता है."
कशिश
"कुछ
तो कशिश है आज भी बाक़ी है हम में
तभी तो आज भी तुम हमारी गलियों के चक्कर लगते हो.
"
इंतज़ार
"अब तुम्हारे इंतज़ार में रातें ही नहीं
दिन भी बहुत लम्बे लगते हैं."
दर्द
" दर्द देकर कितने अनजान बनते हो,
दवा ना सही, बातों का ही मरहम लगा देते."
बीड़ी
" बीड़ी जैसे सिलग रही हूँ तेरी यादों में,
काश, तुम्हारे साथ एक कश मिल जाता."
बेफ़िक्री
" बेफ़िक्री वाली लम्बी -लम्बी बातें अब कहाँ,
अब कुछ लफ़्ज़ों में ज़िंदगी बयान हो जाती है."
Monday, 2 March 2020
दिल की बात
" लफ़्ज़ रह जाते हैं ज़ुबान तक आते-आते,
काश तुम दिल की बात आँखों से पढ़ पाते ."
समझ
"इश्क़ तो हम तुम्हें हमेशा से ही करते थे
ना जाने तुम क्यों इसे दोस्ती समझते रहे."
गुज़ारिश
"अब के मिलने आओ तो
बस इतनी सी गुज़ारिश है
वक़्त को अपने साथ
ज़रूर ले कर आना."
मिठास
"तुम्हारी मोहब्बत की मिठास से
आज फिर फीकी चाय में स्वाद आ गया."
क़िस्से
" मोहल्ले की उन गलियों में
हमारे अधूरे इश्क़ के क़िस्से
आज भी कहे-सुने जाते हैं."
नापतोल
" अब उन्हें कैसे समझायें
नापतोल कर मोहब्बत नहीं,
दुकानदारी की जाती है."
दिल
"बरसों बाद उनसे नज़रें क्या मिली,
कमबख़्त दिल फिर से सोलह का हो गया ."
क़िस्से
"वो अपनी मसरूफ़ियत के क़िस्से सुनते रहे,
हम उन्ही क़िस्सों में उन्हें ढूँढते रहे."
मुद्दत
"तुम आए मुद्दतों बाद
सुनो, आज वक़्त को जाने दो
बस तुम ठहर जाओ. "
उनीस-बीस
" मेरे सवालों में और उनके जवाबों में ,
सिर्फ़ उनीस -बीस का फ़र्क़ था. "
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